21 फरवरी को लालबाग से दरभंगा कमिश्नरी तक महिलाएं एवं पुरूष करेंगे पैदल मार्च- दिल्ली क्राईम प्रैस
दरभंगा- पूरे देश में सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ दो महिने से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है लेकिन सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रहा है। लगातार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग किया जा रहा है कि जिस प्रकार से कई राज्यों में एनपीआर, सीएए, एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया है
उसी प्रकार से बिहार में भी विधानसभा बुलाकर इस काले कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास करें। लेकिन नीतीश कुमार इन दिनों अमित षाह की भाशा बोलने लगे हैं। ऐसा लगता है कि सावरकर और गोडसे की गोद में बैठकर नीतीश कुमार बिहार में आरएसएस के ऐजेंडे पर काम करने लगे हैं। मुसलमानों को सब्जबाग दिखाने और ठगने के लिए 23 फरवरी को मुख्यमंत्री दरभंगा दौरा पर आ रहे हैं और वह यह बताने की कोषिष कर रहे हैं कि मुसलमानों के लिए बड़ी बड़ी योजनाओं का षिलान्यास करेंगे जब्कि हकीकत तो यह है कि छोटी मोटी योजनाओं से मुसलमानों को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वह मुसलमानों के हमदर्द हैं। हरगिज ऐसा नहीं है
अगर वह वाकई बिहार के हक में हैं और जनता के हमदर्द हैं तो दरभंगा दौरा से पहले एनपीआर पर रोक लगाए। अगर ऐसा नहीं कर सकते तो मिथिलांचल खासकर दरभंगा की अमन पंसद जनता दरभंगा दौरे पर नीतीश जी का विरोध करेगी। उक्त बातें आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के अध्यक्ष नजरे आलम ने कही। श्री आलम ने कहा कि लगातार काले कानून के खिलाफ आन्दोलन चल रहा है लेकिन नीतीश कुमार अपना एजेंडा साफ नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि बिहार की जनता में बेचैनी पायी जा रही है। अगर नीतीश कुमार अपना एजेंडा 23 फरवरी से पहले साफ नहीं करते हैं तो दरभंगा जिला में विरोध झेलने को तैयार रहें। नजरे आलम ने दरभंगा की अमन पसंद जनता से अपील करते हुए कहा कि 23 फरवरी के मुख्यमंत्री के दरभंगा दौरे का इतना जर्बदस्त तरीके से विरोध करें कि वह एनपीआर को खारिज करने को मजबूर हो जाएं।
अगर आप ऐसा नहीं करते हैं और वह दरभंगा दौरा में सफल हो जाते हैं तो याद रखें बिहार में भाजपा को 2020 में आने से कोई रोक नहीं सकेगा। वहीं श्री आलम ने बताया कि दरभंगा लालबाग में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह का आज 32वां दिन पूरा हो चुका है और लोग लगातार मजबूती के साथ इस काले कानून के विरोध में डटे हुए हैं। इसी कड़ी में 21 फरवरी को लालबाग से दरभंगा कमिश्नरी तक महिलाएं एवं पुरूषों को पैदल मार्च दिन के 2 बजे निकलेगा। शुक्रवार को दिन के 2 बजे सभी लोग लालबाग से दरभंगा टावर, सुभाश चैक, मशरफ बाजार, किलाघाट, नीमचैक, उर्दू बाजार, करमगंज, दारूभट्टी चैक, बाकरगंज, लोहिया चैक के रास्ते लहेरियासराय टावर होते हुए कमिश्नरी तक पैदल मार्च करेंगे। पैदल मार्च का नेतृत्व नाजिया हसन, सबा प्रवीण, मोतिउर रहमान करेंगें। श्री आलम ने सभी संविधान प्रेमियों, अमन पसंद नागरिकों और सामाजिक संगठनों एवं सेक्यूलर पार्टियों के लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस पैदल मार्च में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर बिहार के मुख्यमंत्री एवं तानाशाह केन्द्र सरकार को यह बता दें कि हम इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लेंगे। श्री आलम ने कहा कि हैदराबाद की तरह संविधान बचाओ संघर्श मोर्चा के पैड पर दरभंगा नगर निगम से भी इस काले कानून के खिलाफ प्रस्ताव पाड़ित करने के लिए महापौर एवं उप-महापौर समेत सभी वार्ड पार्षदों को पत्र लिख कर मांग किया गया है। सत्याग्रह का संचालन बेदारी कारवां के सचिव ई0 फखरूद्दीन कमर कर रहे हैं। लालबाग सत्याग्रह के जिम्मेदार शकील अहमद सलफी, मोतिउर रहमान मोती, बदरूलहोदा खान, नाजिया हसन, सबा प्रवीण, साहिबा प्रवीण, हीरा निजामी, अशरफ सुबहानी, मो0 मुन्ना, फिरोज उर्फ जुम्मन, जाहिद हुसैन, बदरूल हसन, मो0 तमन्ने, सोना खान, राजा खान, जिषान अख्तर, शाहनवाज आकिल, बदिउज्जमा, मो0 बशर, अब्दुल्लाह, मो0 अमानुल्लाह अमन, सोनु मिकरानी, मो0 परवेज, सोनु खान, मो0 अरमान समेत सैकड़ों की संख्या में लोग लगातार इस काले कानून के खिलाफ आन्दोलन कर रहे हें और काले कानून के वापस होने तक इस लड़ाई को लड़ने के लिए डटे हुए हैं।
मोतिउर रहमान
संयोजक
लालबाग सत्याग्रह
दरभंगा
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