शेषनाग पर क्यों सोते हैं भगवान विष्णु
गोरखपुर- जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है तब-तब भगवान विष्णु किसी ना किसी रुप में अवतार लेते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ है लेकिन शेषनाग उनके साथ हर अवतार में जुड़े हुए हैं।
शेषनाग अनंत अर्थात् जिसकी कोई सीमा नहीं, का प्रतीक है। भगवान विष्णु उपयुक्त समय पर मानव जाति का मार्गदर्शन करते हैं। यही कारण है कि उन्हें सांपों के बिस्तर पर लेटा हुआ दिखाया जाता है।
शेषनाग भगवान विष्णु को केवल आराम करने के लिए जगह ही नहीं देते बल्कि वे उनके रक्षक भी हैं। भगवान कृष्ण के जन्म के समय जब पिता वासुदेव उन्हें नंद के घर ले जा रहे थे तब शेषनाग ने ही तूफान से भगवान कृष्ण की रक्षा की थी।
भगवान विष्णु और शेषनाग के बीच का संबंध शाश्वत है। भगवान विष्णु के प्रत्येक अवतार में बुरी शक्तियों का नाश करने के लिए शेषनाग उनके साथ जुड़े हुए हैं। त्रेता युग में शेषनाग ने लक्ष्मण का रूप लिया था जबकि द्वापर में वे बलराम के रूप में थे और दोनों ही जन्मों में उन्होंने राम और कृष्ण की सहायता की थी।
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