पर्यावरण को बचाना एक अनूठा एवं सहारणीय प्रयास। दिल्ली क्राईम प्रैस

फल खाकर बीज इकट्ठे करने का मेरा शौक़ जिसे मैं कर्तव्य समझती हूं, हद पार कर गया है।
मैं हर महीने जब किसी ट्रिप पर जाती हूं, उपयुक्त जंगल, ज़मीन पर फेंकती जाती हूं। 
मेरे पास आजकल तरह तरह के सिट्रस फलों के बीज डब्बा भर हैं। 
ट्रापिकल फलों के भी ढेर लोंगान, पैशनफ्रूट, सीताफल, बेर, अमरूद।

चेरीज़, प्लम्स, बबूगोशा , खूबानी, सेव के भी हैं जिनके लिए पहाड़ पर जाने का इंतज़ार। 

मेरा विश्वास है हज़ार बीज फेंकने पर पचास पेड़ तो उगेंगे। बीस ही उग जाएं। 

फल हमें पेड़ इसी मूक शर्त पर देते हैं कि हम इनको छितराएंगे सही जगह पर, जैसे कि बंदर और गिलहरियां। लेकिन हम कचरा के डिब्बों में फेंक कर सड़ा देते हैं। 

अच्छी लगे मेरी बात तो अपनाएं प्लीज़।

समाज सेविका मनिषा कुल्क्षेत्र


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